राष्ट्रीय दुग्ध दिवस

भारत के पोषण परिदृश्य में दूध केंद्रीय स्थान रखता है, जो उच्च गुणवत्ता वाले पशु प्रोटीन और कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे आवश्यक पोषक तत्वों को आसानी से अवशोषित होने वाले रूपों में प्रदान करता है। अक्सर एक लगभग संपूर्ण भोजन माना जाने वाला दूध, सभी आयु समूहों में वृद्धि, हड्डियों के स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का समर्थन करता है। भारत लगातार दुनिया के अग्रणी दूध उत्पादक के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है, जो वैश्विक उत्पादन में लगभग एक-चौथाई का योगदान करता है। पिछले 11 वर्षों में, भारत के डेयरी क्षेत्र में 70 प्रतिशत की महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में लगभग 5 प्रतिशत का योगदान देता है और 8 करोड़ से अधिक किसानों को सीधा रोजगार प्रदान करता है (राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के अनुसार)। इसके अलावा, महिला किसान उत्पादन और संग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे डेयरी समावेशी और लिंग-उत्तरदायी विकास के लिए एक मजबूत माध्यम बन जाता है।

विश्व टेलीविज़न दिवस

विश्व टेलीविज़न दिवस प्रति वर्ष  21 नवंबर को दुनिया भर में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के माध्यम से 1996 में यह दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। यह दिन हमें बताता है कि टेलीविज़न लोगों को सूचना देने, शिक्षित करने एवं जनता की राय को प्रभावित करने, और संचार तथा और वैश्विक समझ को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी माध्यम है

भारतीय वैज्ञानिकों ने 50 वर्ष पुराने जैविक नियम को नए सिरे से लिखने में मदद की

एक नए अध्ययन ने जीवाणु जीन विनियमन के एक केन्द्रीय पाठ्यपुस्तक मॉडल को उलट दिया है और जीवाणु जीन विनियमन एवं उसके विकास को समझने के नए रास्ते खोले हैं।…

राष्ट्रीय प्रेस दिवस 2025

राष्ट्रीय प्रेस दिवस, जो 16 नवंबर को मनाया जाता है, भारतीय प्रेस परिषद की शुरुआत का प्रतीक है। भारत में पंजीकृत प्रकाशनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2004-05 में 60,143 से बढ़कर 2024-25 में 1.54 लाख हो गई है। श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम, 1955, के…

जनजातीय गौरव दिवस

जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी और उपनिवेशवाद-विरोधी बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में भारत में हर साल 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस (जनजातीय गौरव) मनाया जाता है। बिरसा मुंडा का जन्म 1874 में हुआ था। वर्ष 2024-25 को उनके जन्म के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। साल भर तक चलने वाले देशव्यापी समारोहों के एक भाग के रूप में, 1-15 नवंबर का पखवाड़ा भारत के उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्ष में बिरसा मुंडा और अन्य भारतीय जनजातीय नेताओं के बलिदान और संघर्षों का सम्मान करने और देश की जनजातीय संस्कृतियों और विरासत की समृद्ध विविधता का जश्न मनाने के लिए एक खास तरीके से आयोजित किया जा रहा है।

कैबिनेट ने निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसई) को मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसई) शुरू करने को मंज़ूरी दे दी। इससे राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋण संस्थानों (एमएलआई) को 100 प्रतिशत ऋण गारंटी कवरेज प्रदान किया जा सकेगा ताकि पात्र निर्यातकों, जिनमें एमएसएमई भी शामिल हैं, को 20,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त ऋण सुविधाएं प्रदान की जा सके।

वंदे मातरम के 150 साल

अक्टूबर 1905 में, उत्‍तरी कलकत्ता में मातृभूमि को एक मिशन और धार्मिक जुनून के तौर पर बढ़ावा देने के लिए एक 'बंदे मातरम संप्रदाय'की स्थापना की गई थी। इस संप्रदाय के सदस्य हर रविवार को"वंदे मातरम" गाते हुए प्रभात फेरियाँ निकालते थे और मातृभूमि के समर्थन में लोगों से स्‍वैच्छिक दान भी लेते थे। इस संप्रदाय की प्रभात फेरियों  में कभी-कभी रवींद्रनाथ टैगोर भी शामिल होते थे।

भारत की परमाणु यात्रा में एक नया अध्याय

भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्‍धि हासिल की है। तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 6 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक अपनी प्रथम क्रिटिकैलिटी (स्व-धारित नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया की स्थिति) प्राप्त की, जो एक सतत् परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत का संकेत है। यह पीएफबीआर एक 500 मेगावाट विद्युत (एमडब्ल्यूई) रिएक्टर है, जिसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) द्वारा कल्पक्कम नाभिकीय परिसर में निर्मित किया गया है।

वैज्ञानिकों ने मेंढकों से प्रेरित एक ऐसा सेंसर विकसित किया है जो नमी के प्रति संवेदनशील है और मस्तिष्क की तरह काम करता है

एक नवीन न्यूरोमॉर्फिक सेंसर, जो पर्यावरणीय परिवर्तनों, मुख्य रूप से आर्द्रता, के प्रति मस्तिष्क की प्रतिक्रिया की नकल करता है, और जैविक प्रणालियों के समान एक ही उपकरण में जानकारी को प्रोसेसिंग और संग्रहीत करने की क्षमता रखता है, पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स की तुलना में ऊर्जा खपत और डेटा-प्रोसेसिंग आवश्यकताओं को काफी कम कर सकता है।